US मिडटर्म में 'देसी' फ्लेवर, पिया, अरुणा, सुहास जीते, SIR पर सवाल उठाने वाली प्रमिला ने भी झंडा गाड़ा

Direct Source Verification: This story is aggregated from India Today (indiatoday.in). Full reporting rights and copyright belong to the primary publisher.
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में 'देसी' टैलेंट यानी कि भारतीय मूल के उम्मीदवारों का जलवा देखने को मिला है. इस चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा जैसे नाम शामिल हैं. इनमें भारत के SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने ...

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में 'देसी' टैलेंट यानी कि भारतीय मूल के उम्मीदवारों का जलवा देखने को मिला है. इस चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा जैसे नाम शामिल हैं. इनमें भारत के SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं. इन चुनाव नतीजों से अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भूमिका का पता चलता है. डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले ये नेता अब अमेरिकी संसद और प्रशासन में अहम जिम्मेदारियां निभा रहे हैं.

आइए जानते हैं अमेरिकी चुनाव में जीत दर्ज करने वाले इन भारतीय-अमेरिकी नेताओं के बारे में.

1. अमी बेरा: आठवीं बार पहुंचे अमेरिकी कांग्रेस

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अमी बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर जीत दर्ज की है. 61 वर्षीय अमी बेरा अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना आठवां कार्यकाल शुरू करेंगे.

अमी बेरा का पूरा नाम अमेरिश बाबूलाल बेरा है. उनका जन्म लॉस एंजिलिस में गुजराती प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था. उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, इरविन से बायोलॉजिकल साइंस में ग्रेजुएशन और मेडिकल की पढ़ाई की है. राजनीति में आने से पहले वह डॉक्टर थे. 1999 से 2004 तक उन्होंने सैक्रामेंटो काउंटी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम किया. इसके बाद यूसी डेविस स्कूल ऑफ मेडिसिन में अकादमिक जिम्मेदारी भी संभाली.

अमी बेरा अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति में पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से जुड़ी उपसमिति के रैंकिंग सदस्य हैं. वह हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के भी सदस्य हैं. स्वास्थ्य सेवाओं, भारत-अमेरिका संबंधों और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता रही है.

2. प्रमिला जयपाल: भारतीय मूल की पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला सांसद

चेन्नई में जन्मी प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है. 1965 में जन्मीं प्रमिला महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गई थीं. उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया.

राजनीति में आने से पहले उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जन स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में काम किया. उन्होंने वॉशिंगटन में प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाला संगठन वनअमेरिका भी स्थापित किया.

यह भी पढ़ें: मुस्लिम पहचान, मिस्र से रिश्ता और राजनीति में बड़ा मुकाम, ट्रंप को छकाने वाले अमेरिका के अब्दुल की कहानी!

2016 में पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गईं प्रमिला जयपाल, अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई मूल की महिला हैं. वह कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. फिलहाल वह हाउस ज्यूडिशियरी, विदेश मामलों और बजट समितियों में काम करती हैं. आव्रजन, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर उनकी मुखर भूमिका रही है.

अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 14 अक्टूबर 2026 को भारत में चल रहे SIR पर तीखी टिप्पणी की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत सरकार वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने इसे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार को कमजोर करने वाला कदम बताया था. 

उन्होंने आगे कहा था कि भारत और अमेरिका, दोनों देशों के लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का अधिकार है. जयपाल ने SIR के खिलाफ भारत में हो रहे अहिंसक प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए कहा था कि ऐसे आंदोलनों की जरूरत है और वह लोकतंत्र विरोधी प्रयासों का मुकाबला कर रहे भारतीयों के साथ खड़ी हैं.

इस बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य दखल बताया था.

3. पिया दांडिया: पहली बार अमेरिकी कांग्रेस पहुंचीं

डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया. वह जनवरी में नए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के गठन के साथ अपना कार्यकाल शुरू करेंगी.

पाम बीच काउंटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं पिया के माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे. राजनीति में आने से पहले वह शिक्षिका और हाई स्कूल प्रिंसिपल थीं. उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में हाई स्कूल प्रिंसिपल के रूप में काम किया. वह व्हाइट हाउस फेलो भी रह चुकी हैं और टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल में भी काम कर चुकी हैं.

उनके चुनाव अभियान की वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने कम आय वाले परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुंच दिलाने के उद्देश्य से एक हाई स्कूल की स्थापना की थी.

4. अरुणा मिलर: मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर बनी रहेंगी

भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में दोबारा जीत दर्ज की है. वह गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर अपना दूसरा कार्यकाल संभालेंगी.

आंध्र प्रदेश में जन्मीं अरुणा सात साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गई थीं. उन्होंने मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. राजनीति में आने से पहले उन्होंने मोंटगोमरी काउंटी के परिवहन विभाग में करीब 25 साल तक सिविल और ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियर के रूप में काम किया. इस दौरान उनका फोकस सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बेहतर बनाने पर रहा.

2010 से 2018 तक वह मैरीलैंड हाउस ऑफ डेलीगेट्स की सदस्य रहीं. वह मैरीलैंड की दूसरी महिला लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं. साथ ही राज्य में इस पद पर पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला और पहली प्रवासी महिला भी हैं.

5. रो खन्ना: सिलिकॉन वैली से फिर जीत

भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत दर्ज की है. वे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं. 50 वर्षीय रो खन्ना का निर्वाचन क्षेत्र सिलिकॉन वैली का अहम हिस्सा है.

फिलाडेल्फिया में जन्मे रो खन्ना के माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे. उनके पिता केमिकल इंजीनियर थे, जबकि उनकी मां विशेष जरूरतों वाले बच्चों के साथ काम करने वाली शिक्षिका की सहायक थीं. उनके दादा अमरनाथ विद्यालंकार भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल थे और ब्रिटिश शासन का विरोध करने के कारण चार साल जेल में रहे थे.

रो खन्ना कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस के वाइस चेयरमैन हैं. वह 2020 में बर्नी सैंडर्स के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के सह-अध्यक्ष भी रहे थे. हाल के दिनों में उन्होंने रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी के साथ मिलकर यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग उठाई थी.

6. सुहास सुब्रमण्यम: दूसरी बार जीते चुनाव

डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है. 40 वर्षीय सुहास ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल पक्का किया.

टेक्सास के ह्यूस्टन में जन्मे सुहास पेशे से वकील और उद्यमी हैं. उन्होंने टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के साथ काम किया और अपना कारोबार भी शुरू किया. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में वह व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी पॉलिसी एडवाइजर रह चुके हैं.

कांग्रेस पहुंचने से पहले उन्होंने वर्जीनिया की राजनीति में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वह 2019 से 2023 तक वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स और 2023 से 2024 तक राज्य सीनेट के सदस्य रहे. उन्होंने टुलाने यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है.  

Original Source
https://www.aajtak.in/world/story/us-midterm-elections-parmila-jaipal-indian-americans-who-won-suhas-subramanyam-ntcppl-dskc-2688379-2026-11-04?utm_source=rss
Visit India Today ↗
SHARE STORY:
𝕏 f in

Related Coverage in World