कर्नाटक के दामाद हैं अमेरिका में जीते अब्दुल अल सैयद, अब बनेंगे US के पहले मुस्लिम सीनेटर
अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे अब्दुल अल सैयद का तगड़ा इंडिया कनेक्शन सामने आया है. अब्दुल अल सैयद का निकाह कर्नाटक की सारा जुकाकू से हुआ है. डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद ने मिडटर्म चुनावों में मिशिगन सीनेट सीट जीतकर इतिहास रच दिया है. इन चुनावों में पूरे अमेरिका में 'ब्लू वेव' यानी कि डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर देखने को मिल रही है. हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका कर्नाटक से भी संबंध है. उनकी पत्नी, डॉ. सारा जुकाकू पूर्व मैसूर राज्य सरकार के एक पूर्व मंत्री की पोती हैं.
सारा का परिवार कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल से ताल्लुक रखता है, जो मंगलुरु से लगभग 140 किमी उत्तर में स्थित एक शहर है. उनके दादा, जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू, एक जाने-माने वकील, शिक्षाविद और राजनेता थे. उन्होंने 1950 के दशक में तत्कालीन मैसूर राज्य सरकार में उप-वित्त मंत्री के रूप में काम किया था.
बता दें कि मैसूर राज्य का गठन तब हुआ था जब 1950 में मैसूर साम्राज्य को भारतीय गणराज्य में शामिल किया गया था. 1 नवंबर 1956 को 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' के तहत इसका विस्तार किया गया और नवंबर 1973 में आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया.
अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर चुने गए अब्दुल एल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के पिता 1980 के दशक में अमेरिका गए थे.
सारा के पिता डॉ. जुकाकू एस. तैयब मूल रूप से कर्नाटक के भटकल के रहने वाले हैं. उन्होंने 1976 में बेंगलुरु मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वह बेहतर अवसरों की तलाश में पहले सऊदी अरब गए और फिर 1980 के दशक में अमेरिका के मिशिगन में बस गए. वह किडनी रोग विशेषज्ञ हैं. सारा के दादा जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू मैसूर रियासत की सरकार में डिप्टी फाइनेंस मिनिस्टर रहे थे. उन्होंने भटकल के विकास में भी अहम भूमिका निभाई थी.
सारा का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन में एक भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ था. भले ही वह अमेरिका में पली-बढ़ीं, लेकिन उनके पिता ने यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की कि उनके बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें; इसके लिए वे उन्हें बेंगलुरु और भटकल लेकर आते थे.
'द अमेरिकन बाज़ार' के अनुसार, इस परिवार का कूर्ग से भी जुड़ाव रहा, जबकि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य बाद में बेंगलुरु में बस गए.
सारा जुकाकू और अब्दुल अल-सैयद की मुलाकात कैसे हुई?
सारा ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में पढ़ाई की. जहां उनकी मुलाकात अल-सैयद से हुई. दोनों यूनिवर्सिटी के 'मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन' से जुड़े थे और मई 2006 में उन्होंने शादी कर ली.
'द अमेरिकन बाजार' के अनुसार, शादी के समय सारा की उम्र 19 साल और अल-सैयद की उम्र 21 साल थी.
सारा ने यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से अपनी आगे की पढ़ाई की और 2015 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 'वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स' से मेडिकल की डिग्री हासिल की. इस प्रकाशन के अनुसार, बाद में उन्होंने साइकियाट्री के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और 'यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन हेल्थ' में साइकियाट्री विभाग में एक अहम पद पर भी रहीं.
अल-सैयद ने अपनी पत्नी की भारतीय विरासत से अपने जुड़ाव के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है.
द अमेरिकन बाजार' की रिपोर्ट के अनुसार 23 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने सारा को 'देसी' बताया. यह शब्द आमतौर पर भारतीय मूल के लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने शादी के लगभग दो दशक बाद दक्षिण भारतीय संस्कृति से अपनी जान-पहचान के बारे में मज़ाकिया अंदाज़ में बात की.
उन्होंने कहा, "देखिए, मेरी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में 20 साल पहले हुई थी. अब मैं पूरी तरह से इसमें घुल-मिल गया हूं. सच कहूं तो, शायद मैं अरब होने से ज़्यादा भारतीय हूं."
एक और मौके पर उन्होंने अपनी पत्नी और अपनी दो बेटियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह 'देसी' महिलाओं से घिरे हुए हैं.
कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने इस जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा, "अब US सीनेट से हमारा कर्नाटक कनेक्शन भी जुड़ गया है. US के पहले मुस्लिम सीनेटर अब्दुल सैयद की पत्नी सारा सारा जुकाकू भटकल से आए एक प्रवासी की बेटी हैं. उनके दादा, शम्सुद्दीन जुकाकू, एक बेहद सम्मानित राजनेता थे और BD जत्ती तथा S निजलिंगप्पा के समय मैसूर सरकार में मंत्री भी रहे थे. सच में US अलग-अलग संस्कृतियों का एक अद्भुत संगम है.

