Ramayana: 1 करोड़ का सिंहासन और 1.5 करोड़ का रथ, 24 कैरेट सोने से तैयार हुआ रावण का दरबार!

Direct Source Verification: This story is aggregated from India Today (indiatoday.in). Full reporting rights and copyright belong to the primary publisher.
नितेश तिवारी की 'रामायण: राइज ऑफ अ लीजेंड' की भव्य दुनिया केवल विजुअल इफेक्ट्स का नतीजा नहीं है. इसके विशाल सेट और शानदार लोकेशन्स के पीछे कलाकारों और तकनीशियनों की एक ऐसी टीम है, जिसने इस महाकाव्य को जीवंत करने के लिए महीनों तक कड़ी मेहनत की है. उनकी बेहतरीन कारीगरी का एक बड़ा उ...

नितेश तिवारी की 'रामायण: राइज ऑफ अ लीजेंड' की भव्य दुनिया केवल विजुअल इफेक्ट्स का नतीजा नहीं है. इसके विशाल सेट और शानदार लोकेशन्स के पीछे कलाकारों और तकनीशियनों की एक ऐसी टीम है, जिसने इस महाकाव्य को जीवंत करने के लिए महीनों तक कड़ी मेहनत की है. उनकी बेहतरीन कारीगरी का एक बड़ा उदाहरण रावण का सिंहासन है, जिसे बनाने में लगभग 1 करोड़ रुपये का खर्च आया और इसे पूरा करने में चार महीने लगे.

'प्रभात खबर' के साथ एक इंटरव्यू में, फिल्म के आर्ट डायरेक्टर रमेश ने प्रोडक्शन के बड़े पैमाने के बारे में बात की और बताया कि फ़िल्म के लिए 150 से ज्यादा सेट तैयार किए गए थे. उन्होंने फिल्म के कुछ सबसे जटिल स्ट्रक्चर्स और प्रॉप्स के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.

'रामायण' के लिए सेट बनाने का काम अप्रैल 2024 में मुंबई फिल्म सिटी के 'प्राइम फ़ोकस स्टूडियो' में शुरू हुआ. रमेश के अनुसार, हर स्ट्रक्चर को फ़ाइनल करने से पहले उसमें 10 से 15 बार डिजाइन में बदलाव किए गए. केवल ग्रीन स्क्रीन पर निर्भर रहने के बजाय, टीम ने बारीकी से काम करते हुए विस्तृत फिजिकल सेट तैयार किए. जिसमें फर्श के टेक्सचर और दीवारों के डिजाइन से लेकर सोने की सजावट तक सब कुछ शामिल था.

24 कैरेट सोने का इस्तेमाल सबसे महंगी चीजों में से एक रावण का सिंहासन था. इसे बनाने में चार महीने लगे और लगभग 1 करोड़ रुपये का खर्च आया. मिट्टी के बेस का इस्तेमाल करके इसे फाइबर से ढाला गया और अंत में इस पर 24 कैरेट सोने की परत (गोल्ड लीफ़िंग) चढ़ाई गई. शूर्पणखा का रथ भी एक बड़ा प्रोजेक्ट था, जिसे बनाने में तीन महीने लगे और लगभग 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आया.

बताया जाता है कि कलाकारों को आसानी से एक्टिंग करने में मदद करने के लिए टीम ने कई बड़े प्रॉप्स भी बनाए. जटायु का 24 फीट ऊंचा कंकाल मॉडल तैयार किया गया, ताकि कलाकार अपनी नजर (आई-लाइन) और संवाद बोलने (डायलॉग डिलीवरी) में इसका सहारा ले सकें. इसके अलावा, 50 फ़ीट व्यास वाला विशाल 'पुष्पक विमान' भी बनाया गया. चूंकि यह इतना बड़ा था कि स्टूडियो के अंदर नहीं आ सकता था, इसलिए इसे 40 से 50 दिनों में चार अलग-अलग हिस्सों (मॉड्यूल्स) में तैयार किया गया. इस विमान का कॉन्सेप्ट नितेश तिवारी ने छह साल में विकसित किया था.

इस प्रोडक्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत पड़ी. खबरों के अनुसार, लंका का सेट बनाने के काम में एक साथ लगभग 500 से 600 मजदूर लगे हुए थे, जबकि भीड़ वाले कुछ बड़े दृश्यों में 1,000 तक डांसर और जूनियर कलाकार शामिल थे.

रमेश ने आगे बताया कि नितेश तिवारी ने शूटिंग से एक दिन पहले खुद हर सेट का मुआयना किया. इसके अलावा, सब कुछ सही ढंग से तैयार है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशक ने शूटिंग से चार दिन पहले विस्तृत स्टोरीबोर्ड और कॉन्सेप्ट आर्ट की भी समीक्षा की.

वहीं फिल्म रामायण से जुड़े कॉस्ट्यूम डिजाइनर अजय कुमार ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्टर पर एक कवच शेयर किया. उन्होंने लिखा, 'यह कवच सिर्फ एक डिजाइन नहीं है; यह मेरी सोच, मेरी लगन और मेरी कड़ी मेहनत का नतीजा है. इस रचना के लिए मैं खुद असम गया, जहां मेरी टीम और मैंने मिलकर इस सोच को जमीनी हकीकत में बदला. सरपत की डंडियों के आधार पर बने इस कवच में जूट की सजावट और लकड़ी के टुकड़ों को बहुत बारीकी से जोड़ा गया है. इसे बनाने की पूरी प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण थी. इसमें समय, सटीकता, धैर्य और असीम समर्पण की जरूरत थी.'

उन्होंने आगे लिखा, 'मैं जानता हूं कि इस कवच को बनाने में कितनी मेहनत लगी है, कैसा सफर रहा है और कितने अनगिनत घंटे लगे हैं. कुछ रचनाएं इसलिए याद रखी जानी चाहिए- सिर्फ इसलिए नहीं कि वे कैसी दिखती हैं, बल्कि इसलिए भी कि उनके पीछे क्या कहानी है और उन्हें बनाने वाले लोग कौन हैं.'

Original Source
https://www.aajtak.in/entertainment/bollywood-news/story/ramayana-yash-ravana-throne-costs-1-crore-24-karat-gold-plating-surpanakha-chariot-1-crore-rupees-over-tmovg-dskc-2690192-2026-11-06?utm_source=rss
Visit India Today ↗
SHARE STORY:
𝕏 f in

Related Coverage in World