सोना खरीदें या चांदी? लेने से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की सलाह

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धनतेरस और दिवाली के मौके पर सोना-चांदी खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है. कोई इस दिन गहने खरीदता है तो कोई सोने-चांदी का सिक्का या बार लेकर घर आता है. लेकिन इस बार सोने-चांदी की कीमतों में जिस तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, उसने खरीदारों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा क...

धनतेरस और दिवाली के मौके पर सोना-चांदी खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है. कोई इस दिन गहने खरीदता है तो कोई सोने-चांदी का सिक्का या बार लेकर घर आता है. लेकिन इस बार सोने-चांदी की कीमतों में जिस तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, उसने खरीदारों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. ऐसे में इस त्योहारी सीजन में गोल्ड या सिल्वर खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि इनकी कीमतें क्यों बदलती हैं, आगे किन वजहों से तेजी आ सकती है और निवेश के लिहाज से सोना-चांदी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

सोने-चांदी की कीमतों में इस साल कैसी रही हलचल?

जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा, जबकि चांदी 100 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई. इसके बाद दोनों की कीमतों में तेज गिरावट आई. सोना 4,000 डॉलर से नीचे गया तो चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली. बाद में दोनों की कीमतों में रिकवरी हुई. भारतीय बाजार में रुपये की डॉलर के मुकाबले चाल ने भी इनके भाव को प्रभावित किया.

सोना और चांदी में से किसमें ज्यादा रिस्क और रिटर्न?

सोने और चांदी में सबसे बड़ा अंतर इनके उतार-चढ़ाव का है. सोने को आमतौर पर सुरक्षित और रक्षात्मक निवेश माना जाता है. वहीं चांदी की कीमत तेजी के दौरान सोने से ज्यादा बढ़ सकती है, लेकिन गिरावट आने पर इसमें नुकसान भी ज्यादा हो सकता है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट भी सोने को अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प और चांदी को ज्यादा जोखिम वाला निवेश बताती है. इसलिए निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता समझना जरूरी है.

सोने और चांदी की कीमतें किन वजहों से बदलती हैं?

दोनों धातुओं की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और दुनिया में चल रहे तनाव का असर पड़ता है. डॉलर मजबूत होने और अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने पर सोने-चांदी पर दबाव आ सकता है. वहीं युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई बढ़ने पर निवेशक कीमती धातुओं की तरफ रुख करते हैं. चांदी की मांग पर औद्योगिक इस्तेमाल का भी असर पड़ता है. इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और दूसरी इंडस्ट्री में चांदी की जरूरत इसकी कीमतों को प्रभावित करती है.

दिवाली से पहले सोना खरीदना ज्यादा फायदेमंद है?

पिछले 10 साल के ट्रेंड के मुताबिक, सोने ने दिवाली से पहले के 30 दिनों में आमतौर पर दिवाली के बाद के 30 दिनों से बेहतर प्रदर्शन किया है. साल 2025 में दिवाली से पहले के एक महीने में सोना करीब 20 फीसदी चढ़ा था. हालांकि, 2016 और 2021 में दिवाली से पहले सोने की कीमतों में गिरावट भी आई थी. इसलिए यह ट्रेंड भविष्य में कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं देता. चांदी के लिए भी केवल त्योहार के समय को देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा.

दुनियाभर के केंद्रीय बैंक क्यों खरीद रहे हैं सोना?

दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान केंद्रीय बैंकों ने नेट 321 टन सोना खरीदा. इसी अवधि में गोल्ड ETF में 211 टन की खरीदारी हुई. यह मांग सोने की कीमतों को लंबे समय में सपोर्ट दे सकती है. हालांकि, चांदी की मांग का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक इस्तेमाल से भी आता है.

चांदी में निवेश करने वालों को इसकी कीमतों में तेज बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए. इसकी कीमत पर निवेश मांग के साथ-साथ इंडस्ट्री की जरूरतों का भी असर पड़ता है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी इंडस्ट्री में इस्तेमाल बढ़ने से चांदी की मांग बढ़ सकती है. लेकिन औद्योगिक मांग कमजोर होने पर कीमतों पर दबाव भी आ सकता है. इसलिए चांदी में निवेश करते समय सिर्फ तेजी की संभावना नहीं, बल्कि गिरावट का जोखिम भी ध्यान में रखना चाहिए.

गहने, सिक्के या गोल्ड-सिल्वर ETF, क्या खरीदना बेहतर?

अगर परिवार या शादी के लिए गहने खरीदने हैं तो ज्वेलरी बेहतर विकल्प हो सकती है. लेकिन सिर्फ निवेश के लिए सोना या चांदी खरीद रहे हैं तो सिक्के, बार और ETF जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं. गहनों पर मेकिंग चार्ज लगता है, जो बेचते समय वापस नहीं मिलता. वहीं ETF के जरिए बिना धातु को घर में रखे भी निवेश किया जा सकता है. हर विकल्प के अपने खर्च और जोखिम हैं.  

सोना-चांदी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने और चांदी में लंबी अवधि के निवेश की संभावना बनी हुई है, लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. मोतीलाल ओसवाल के नवनीत दमानी और मानव मोदी ने ऊंचे भाव पर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार करने की सलाह दी है. इसलिए इन कीमती धातुओं की खरीदारी करते समय अपनी जरूरत, बजट और निवेश की अवधि को ध्यान में रखें. सिर्फ इस उम्मीद में पैसा न लगाएं कि अगले कुछ दिनों में कीमतें जरूर बढ़ेंगी.

Original Source
https://www.aajtak.in/business/utility/photo/gold-silver-dhanteras-diwali-investment-demand-volatility-outlook-risk-returns-experts-suggestion-dpmx-2689691-2026-11-06?utm_source=rss
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