अमेरिकी चुनाव में प्रो-इंडिया 'समोसा कॉकस' का क्या हुआ? रोचक हैं नतीजे
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के नेताओं के लिए नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के सांसदों का अनौपचारिक समूह 'समोसा कॉकस' एक बार फिर मजबूत होता दिख रहा है. डेमोक्रेट्स के प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के साथ इस ग्रुप की ताकत भी बढ़ने जा रही है. चार पुराने भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने अपनी सीट बचाई है. वहीं, दो नए चेहरे भी इस समूह से जुड़ने जा रहे हैं. इनमें फ्लोरिडा से जीतने वाली पिया डांडिया और एरिजोना से आगे चल रहे अमीष शाह शामिल हैं.
दरअसल, अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के सांसदों के अनौपचारिक समूह को 'समोसा कॉकस' कहा जाता है. इसमें भारतीय-अमेरिकी सांसद शामिल हैं. यह कोई आधिकारिक संसदीय समूह नहीं है. इसके सदस्य भारतीय मूल के लोगों से जुड़े मुद्दों और अमेरिका-भारत संबंधों पर भी अपनी राय रखते रहे हैं. इस बार के चुनाव में इस ग्रुप की संख्या घटने की आशंका थी. लेकिन नतीजों ने इसकी तस्वीर बदल दी है.
इस चुनाव में चार भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने प्रतिनिधि सभा में अपनी सीट बरकरार रखी है. इनमें अमी बेरा, रो खन्ना, सुहास सुब्रमण्यम और प्रमिला जयपाल शामिल हैं. इन सभी ने चुनाव में जीत दर्ज की है. अब ये सभी अगले कार्यकाल में भी अमेरिकी संसद का हिस्सा रहेंगे.
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इस चुनाव में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने भी जीत दर्ज की है. उन्होंने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया. उन्हें 51.9 फीसदी वोट मिले. पिया डांडिया पहले हाई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं. उनका जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ है. उनकी जीत को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए अहम माना जा रहा है.
वहीं एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमीष शाह जीत की ओर बढ़ रहे थे. वह पेशे से इमरजेंसी रूम डॉक्टर हैं. 85 फीसदी वोटों की गिनती तक उन्हें 52.6 फीसदी वोट मिले थे. उनके विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के जे फेली को 45.4 फीसदी वोट मिले. हालांकि, उस समय नतीजे घोषित नहीं हुए थे. उनकी जीत के बाद समोसा कॉकस में एक और भारतीय-अमेरिकी चेहरा जुड़ सकता है.
अमी बेरा कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से फिर चुने गए हैं. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराया. यह उनकी लगातार आठवीं जीत है. वह अमेरिकी संसद में सबसे लंबे समय से मौजूद भारतीय-अमेरिकी सांसद हैं. पेशे से डॉक्टर रहे बेरा स्वास्थ्य और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. वह हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सदस्य भी हैं.
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वहीं, भारतवंशी रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है. यह इलाका सिलिकॉन वैली में आता है. वह अब छठी बार प्रतिनिधि सभा में पहुंचेंगे. वहीं, वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से सुहास सुब्रमण्यम दोबारा चुने गए हैं. उन्हें 61 फीसदी से ज्यादा वोट मिले. वह पहले बराक ओबामा के सलाहकार भी रह चुके हैं.
वॉशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से प्रमिला जयपाल ने भी जीत दर्ज की है. यह उनका छठा कार्यकाल होगा. वह इमिग्रेशन और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही हैं. वहीं, मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी दोबारा जीत हासिल की है. वह डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं.
हालांकि, हर भारतीय मूल के उम्मीदवार के लिए यह चुनाव अच्छा नहीं रहा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाले विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव हार गए. उन्हें डेमोक्रेट उम्मीदवार एमी एक्टन ने हराया. रिपब्लिकन महेश गनोरकर भी नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से हार गए.
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वहीं, टेक्सास में डेमोक्रेट पिया सेठी ने राज्य विधानसभा के चुनाव में जीत दर्ज की. वह वहां चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी और हिंदू विधायक बनीं. हालांकि, टेक्सास हाउस के एक अन्य उम्मीदवार संदीप श्रीवास्तव को हार का सामना करना पड़ा.
इन नतीजों से साफ है कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है. प्रतिनिधि सभा में पुराने चेहरों की वापसी और नए नेताओं की जीत से समोसा कॉकस को फिर मजबूती मिलने जा रही है.


