बुलेट ट्रेन के लिए अलग से बनेगा रेलवे स्टेशन, जानिए कानपुर में कहां रुकेगी यह हाई स्पीड वाली यह रेल गाड़ी
कानपुर में बुलेट ट्रेन के स्टेशन को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है. कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने दावा किया है कि शहर में स्टेशन बनाने के लिए अटल घाट के पास या शहर के भीतर टनल के जरिए स्टेशन तैयार करने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है. इसके साथ ही बुलेट ट्रेन के पुराने रूट में बदलाव कर आगरा से सीधे कानपुर होते हुए लखनऊ तक कनेक्टिविटी का रास्ता तैयार किया गया है. इससे पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित नॉर्थ कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कानपुर समेत कई शहरों के बीच यात्रा का समय कम होने की जानकारी दी थी.
कानपुर के लोगों के मन में लंबे समय से एक सवाल है कि अगर शहर से बुलेट ट्रेन गुजरेगी तो उसका स्टेशन कहां बनाया जाएगा? क्या स्टेशन शहर के बाहर होगा या फिर शहर के भीतर ही यात्रियों को ट्रेन पकड़ने की सुविधा मिलेगी? अब इस सवाल पर सांसद रमेश अवस्थी की ओर से अहम जानकारी साझा की गई है. सांसद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह पक्ष रखा है कि बुलेट ट्रेन का स्टेशन ऐसी जगह बनाया जाए, जहां कानपुर की जनता और आम नागरिकों को आवाजाही में अधिकतम सुविधा मिल सके. इसी सोच के साथ अटल घाट के समीप या शहर के भीतर टनल के जरिए स्टेशन बनाने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है. इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद कानपुर में बुलेट ट्रेन स्टेशन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अगर शहर के भीतर स्टेशन बनाने का विकल्प तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव होता है तो यात्रियों को शहर के बाहरी हिस्से तक पहुंचने की परेशानी से राहत मिल सकती है. हालांकि, स्टेशन की अंतिम लोकेशन, निर्माण की तकनीक और समयसीमा को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा.
सांसद रमेश अवस्थी ने अपने पोस्ट में एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. उनके मुताबिक, पहले प्रस्तावित रूट में संशोधन करवाकर बुलेट ट्रेन को आगरा से सीधे कानपुर लाते हुए लखनऊ से जोड़ने का काम किया गया है. यह बदलाव कानपुर के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. अभी दिल्ली, आगरा, कानपुर और लखनऊ के बीच यात्रा के लिए यात्रियों को अलग-अलग परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ता है. बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तैयार होने के बाद इन शहरों के बीच तेज रफ्तार रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. बता दें कि कानपुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक शहरों में शामिल है. यहां बड़ी संख्या में कारोबारी, नौकरीपेशा लोग, छात्र और दूसरे शहरों से आने-जाने वाले यात्री रहते हैं. ऐसे में बुलेट ट्रेन की सीधी कनेक्टिविटी से व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ शिक्षा, चिकित्सा और पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर बन सकते हैं.
इससे पहले वाराणसी में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को लेकर अहम जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद प्रस्तावित नॉर्थ कॉरिडोर दिल्ली को आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या से जोड़ते हुए आगे वाराणसी, प्रयागराज और पटना तक कनेक्टिविटी स्थापित करेगा. रेल मंत्री के मुताबिक, इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद दिल्ली से कानपुर की यात्रा में करीब 1 घंटा 45 मिनट लगेंगे. वहीं दिल्ली से आगरा पहुंचने में 59 मिनट और दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में लगभग 2 घंटे 12 मिनट का समय लगेगा. उन्होंने वाराणसी से लखनऊ की यात्रा का समय 1 घंटा 21 मिनट, वाराणसी से पटना का एक घंटा और वाराणसी से दिल्ली का करीब 3 घंटे 33 मिनट बताया. वाराणसी से प्रयागराज की दूरी भी बुलेट ट्रेन से महज 33 मिनट में तय होने की बात कही गई. ये प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए बताए गए यात्रा समय हैं. वास्तविक समय रूट, स्टेशनों और परियोजना के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया था कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन सेवाएं एक घंटे के अंतराल पर संचालित करने की योजना है. इसका मतलब है कि यात्रियों को ट्रेन के लिए बहुत लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इस सुविधा से मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे कारोबारियों, एमएसएमई सेक्टर, युवाओं, विद्यार्थियों और इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने वाले लोगों को खास फायदा मिलने की उम्मीद है. कानपुर के कारोबारी वर्ग के लिए यह कनेक्टिविटी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली, आगरा और लखनऊ जैसे शहरों तक कम समय में पहुंचना व्यापारिक बैठकों, माल ढुलाई से जुड़ी गतिविधियों और कारोबारी संपर्कों को नई गति दे सकता है.
रेल मंत्री ने अपने बयान में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि इस रूट का पहला सेक्शन अगले साल शुरू करने की तैयारी है. वहीं दिल्ली से सिलीगुड़ी और आगे गुवाहाटी तक प्रस्तावित नॉर्थ कॉरिडोर के डिजाइन पर काम चल रहा है. उन्होंने बताया कि परियोजना में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न निर्माण संबंधी हिस्सों को मानकीकृत करने और फैक्ट्री में तैयार करने की योजना है. इससे निर्माण कार्य में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

