लॉ ही नहीं, लंदन से भी की पढ़ाई... जानिए सांसारिक जीवन में कितनी डिग्री ले चुकी हैं प्रखरश्री दीदी?
मध्य प्रदेश के बैतूल की रहने वाली प्रखरश्री दीदी ने कानून की पढ़ाई में अपनी अलग पहचान बनाई है. LLB की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी मेहनत का एक बड़ा पड़ाव साल 2023 में आया, जब उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ. लेकिन अदालत में जिम्मेदारी संभालने से पहले ही उन्होंने जैन दीक्षा लेने और आध्यात्मिक राह पर आगे बढ़ने का निर्णय कर लिया. भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रखरश्री की शुरुआती पढ़ाई मध्य प्रदेश के बैतूल में हुई. इसके बाद उन्होंने भोपाल से ही हायर सेकेंडरी की शिक्षा पूरी की. स्कूली पढ़ाई के बाद उन्होंने कानून के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया.
12वीं के बाद प्रखरश्री ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) क्वालिफाई किया. इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद से LLB की पढ़ाई पूरी की. कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अकादमिक प्रदर्शन जारी रखा. कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रखरश्री ने न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की.
साल 2023 में उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने अपने माता-पिता का जज बनने का सपना भी पूरा किया. लेकिन पद पर जॉइनिंग से पहले उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने के बजाय जैन दीक्षा लेने का फैसला कर लिया. प्रखरश्री का कहना है कि बचपन से ही उनकी रुचि आध्यात्मिक जीवन में थी. उनके मुताबिक, जज या वकील के रूप में काम करने के मुकाबले भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर वे समाज की अधिक सेवा कर सकती हैं.
जज या वकील बनकर नहीं कर पाती उतनी सेवा...
प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता का सपना था कि वह जज की परीक्षा पास कर लें. हालांकि, उन्होंने अपने माता-पिता का सपना पूरा कर दिया है लेकिन जॉइनिंग से पहले ही उन्होंने वैराग्य लेने का फैसला कर दिया है. उनका कहना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी महावीर के मार्ग पर चलकर कर सकती हैं.
भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी शुरुआती पढ़ाई बैतूल से हुई. इसके बाद उन्होंने भोपाल के ही स्कूल से आगे की पढ़ाई की. इतना ही नहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एलएलएम में गोल्ड मेडल हासिल किया. उच्च शिक्षा के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी कोर्स किया. फिर साल 2023 में उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ. यह परिवार के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन प्रखरश्री के मन में बचपन से ही आध्यात्मिक जीवन के प्रति गहरा आकर्षण था.
यह कहानी बैतूल की प्रखरश्री की है. अब वे ब्रह्मचारिणी बनने जा रही हैं. जैनेश्वरी दीक्षा का संकल्प लेकर उन्होंने मोक्ष का मार्ग चुना है. उनके पिता LIC से रिटायर्ड अफसर हैं. उनके साथ चार अन्य बहनों ने भी सांसारिक मोह छोड़कर भक्ति का मार्ग अपनाया है. रविवार को बैतूल में पांचों बहनों की बिनौली यात्रा निकाली गई.


