शाहिद कपूर ने क्यों कहा- जल्दी बच्चे कर लेने चाहिए, मीरा से करीना ने भी कम उम्र में बच्चे को लेकर किया था सवाल
बच्चों की परवरिश करना जिंदगी की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक माना जाता है. शादी के बाद माता-पिता बनने का फैसला हर किसी के लिए खास होता है, लेकिन आज के दौर में कई लोग करियर, आर्थिक जिम्मेदारियों और अपनी जिंदगी को थोड़ा और समय देने के लिए इस फैसले को आगे बढ़ा देते हैं. वहीं, बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर और उनकी पत्नी मीरा राजपूत की कहानी इससे थोड़ी अलग है. मीरा ने काफी कम उम्र में शादी की और जल्द ही माता-पिता भी बन गए. खास बात यह है कि मीरा कपूर कम उम्र में पैरेंट्स बनने के अपने फैसले को जिंदगी का एक खूबसूरत अनुभव मानती हैं. वहीं शाहिद भी कम उम्र में मां-बाप बनने के फायदे गिनाते हैं.
हाल ही में मीरा राजपूत ने करीना कपूर के शो में अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं. इस दौरान उन्होंने बताया कि महज 21 साल की उम्र में मां बनने का उनका एक्सपीरियंस कैसा रहा और इस सफर में शाहिद ने किस तरह उनका साथ दिया. वहीं, दूसरी ओर शाहिद कपूर भी कम उम्र में शादी और परिवार शुरू करने के फैसले को लेकर अपनी राय रख चुके हैं. कपिल शर्मा के शो में उन्होंने अपने छोटे भाई ईशान खट्टर को भी जल्द शादी करने की सलाह दे डाली है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर शाहिद और मीरा कम उम्र में माता-पिता बनने को क्यों खास मानते हैं और इस बारे में दोनों ने क्या कुछ बताया है.21 साल की उम्र में मां बनी थीं मीरा शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की शादी साल 2015 में हुई थी. उस वक्त मीरा महज 21 साल की थीं. शादी के करीब एक साल बाद ही दोनों बेटी मिशा के माता-पिता बने. इसके बाद साल 2018 में उनके घर बेटे जैन का जन्म हुआ. अब मीरा ने करीना कपूर खान के शो 'वॉट वीमेन वांट' में कम उम्र में मां बनने के अपने एक्सपीरियंस के बारे में बात की है.
करीना ने मीरा से पूछा कि क्या वह जिंदगी के किसी दूसरे पड़ाव पर मां बनना पसंद करतीं? इस पर मीरा ने कहा कि वह अपनी जिंदगी के इस फैसले को बिल्कुल नहीं बदलना चाहेंगी. उनके मुताबिक, मां बनने की जिम्मेदारी किसी भी उम्र में चुनौतीपूर्ण होती है. बच्चों की परवरिश के दौरान कई बार माता-पिता परेशान और जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा महसूस करते हैं. हालांकि, उस वक्त शाहिद का साथ और अपनी बहनों से मिली सीख ने उनके लिए चीजें आसान कर दी थीं.
40 की उम्र में बेटी हो जाएगी 21 साल की मीरा ने कम उम्र में मां बनने का एक खास फायदा भी बताया. उन्होंने कहा कि जब वह 41 साल की होंगी, तब उनकी बेटी मिशा 21 साल की हो जाएगी. यानी उस उम्र में जब कई लोग अपने बच्चों की परवरिश के शुरुआती दौर में होते हैं, तब मीरा अपनी बेटी को बड़ा होते देख रही होंगी.
मीरा के मुताबिक, उन्हें बच्चों के साथ समय बिताना पसंद है और वह उनके साथ एक खास बॉन्ड शेयर करती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों की परवरिश में पति-पत्नी दोनों की बराबर भागीदारी जरूरी है. एक इंसान अकेले हर जिम्मेदारी नहीं संभाल सकता.
बच्चों की स्पोर्ट्स और डाइट संभालते हैं शाहिद मीरा ने बताया कि उनके घर में बच्चों की जिम्मेदारियां दोनों ने आपस में बांट रखी हैं. शाहिद बच्चों के स्पोर्ट्स और डाइट का ध्यान रखते हैं, जबकि मीरा होमवर्क, बर्थडे पार्टी, क्लासेज और बच्चों के बिहेवियर से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालती हैं. हालांकि, अगर दोनों में से कोई एक ट्रैवल कर रहा हो, तो दूसरे को सारी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं.
शाहिद ने भी ईशान को दी जल्दी पिता बनने की सलाह सिर्फ मीरा ही नहीं, शाहिद भी कम उम्र में माता-पिता बनने को लेकर अपनी राय जाहिर की है. हाल ही में कपिल शर्मा के शो में जब शाहिद से पूछा गया कि वह छोटे भाई ईशान खट्टर को क्या सलाह देना चाहेंगे, तो उन्होंने उन्हें जल्द शादी करने की सलाह दी. शाहिद ने यह भी कहा कि वह खुद देर से शादी नहीं करना चाहते थे. हालांकि, उनकी शादी 34 साल की उम्र में हुई थी.
शाहिद ने इसके पीछे की एक दिलचस्प वजह भी बताई. उनके मुताबिक, बच्चों के साथ बड़े होने के दौरान कुछ ऐसी एक्टिविटीज होती हैं, जिनमें माता-पिता को उनके साथ शामिल होना चाहिए. खासकर स्पोर्ट्स और खेलकूद जैसी चीजों में बच्चों का साथ देने के लिए माता-पिता में भी एनर्जी होनी चाहिए. शाहिद का मानना है कि अगर जिंदगी में बहुत देर से बच्चे होते हैं, तो उनके बड़े होने के दौरान उनके साथ इन एक्टिविटीज में हिस्सा लेना मुश्किल हो सकता है.
दोनों बच्चों के साथ खास बॉन्ड शेयर करते हैं शाहिद-मीरा शाहिद और मीरा अपनी बेटी मिशा और बेटे जैन के साथ अक्सर समय बिताते नजर आते हैं. दोनों बच्चों की परवरिश में अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं. मीरा और शाहिद की इन बातों से साफ है कि उनके लिए कम उम्र में माता-पिता बनने का सबसे बड़ा फायदा बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना और उनके बड़े होने के सफर में हर पड़ाव पर साथ रहना है.


