आगा रुहुल्लाह मेहदी ने छोड़ी नेशनल कॉन्फ्रेंस, लोकसभा की सदस्यता से भी दिया इस्तीफा, क्या J&K में बनेगा नया सियासी मोर्चा?
जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी से नाता तोड़ने और लोकसभा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने बडगाम में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि पर आयोजित एक बड़ी जनसभा में यह फैसला सार्वजनिक किया.
इस घटनाक्रम को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए अहम राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. रुहुल्लाह के इस कदम के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए सियासी समीकरण बनने की चर्चा भी तेज हो गई है.
आगा रुहुल्लाह मेहदी लंबे समय से नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व से असहमत चल रहे थे. उनका आरोप रहा है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान जनता से किए गए अहम वादों को सत्ता में आने के बाद प्राथमिकता नहीं दी. खास तौर पर अनुच्छेद 370 की बहाली, जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा, आरक्षण व्यवस्था में सुधार और राजनीतिक बंदियों की रिहाई जैसे मुद्दों पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व को घेरा है.
उनका कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर जनता से समर्थन मांगा गया था, उन्हें अब पीछे छोड़ दिया गया है. इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पार्टी और संसद दोनों से अलग होने का फैसला किया.
आगा रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस से करीब 24 साल पुराना रिश्ता रहा है. वह 2024 के लोकसभा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में शामिल थे.
उन्होंने पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में घाटी के अलग-अलग इलाकों में प्रचार किया था. लेकिन चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद लगातार बढ़ते गए. अब उन्होंने पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया है.
रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है. उनके मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जनता से समर्थन मांगा था.
लेकिन सरकार बनने के बाद इन मुद्दों को लेकर अपेक्षित राजनीतिक प्रयास नहीं किए गए. उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेश में भी कहा था कि वह ऐसे वादों के साथ अपना नाम नहीं जोड़ सकते, जिन्हें पूरा करने की कोशिश नहीं की जा रही है.
आगा रुहुल्लाह मेहदी के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नए राजनीतिक मोर्चे की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है. बडगाम में होने वाली उनकी रैली को इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें उनके समर्थकों की मौजूदगी और आगे की रणनीति पर नजर रहेगी.
धार्मिक विद्वानों और कुछ राजनीतिक लोगों ने भी उनके रुख का समर्थन किया है. हालांकि, अभी तक रुहुल्लाह ने किसी नई पार्टी या राजनीतिक संगठन के गठन का औपचारिक ऐलान नहीं किया है.
उनके इस्तीफे के बाद श्रीनगर लोकसभा सीट को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं. हालांकि, लोकसभा की सदस्यता छोड़ने के लिए इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. इसके बाद ही सीट रिक्त होने और उपचुनाव की प्रक्रिया का सवाल सामने आएगा.
फिलहाल, सबकी नजरें बडगाम में उनके संबोधन और इस्तीफे से जुड़े औपचारिक कदमों पर हैं. यह भी देखना होगा कि वह आगे अकेले राजनीतिक रास्ता चुनते हैं या किसी नए संगठन अथवा मोर्चे के साथ आगे बढ़ते हैं.


