लाहौर से दिल्ली तक हवा हुई 'नापाक', AQI खतरनाक स्तर पर
उत्तरी भारत और पाकिस्तान के कई इलाकों में मंगलवार को वायु गुणवत्ता तेजी से खराब हो गई. सर्दी से पहले की धुंध ने लाहौर को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बना दिया. दिल्ली में भी अधिकारियों ने जहरीली धुंध से निपटने के लिए कई पाबंदियां लगा दीं.
इस मौसम में ठंडी और भारी हवा वाहनों, निर्माण स्थलों और फसल अवशेष जलाने से निकलने वाले प्रदूषण को जमीन के पास फंसा लेती है. इससे प्रदूषण का स्तर दुनिया में सबसे ऊंचा पहुंच जाता है. लोगों को सांस संबंधी गंभीर खतरे का सामना करना पड़ता है. नवंबर 8 को दीवाली के पटाखे इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं.
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स्विस समूह आईक्यूएयर के अनुसार मंगलवार सुबह लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 447 दर्ज किया गया. 50 तक का स्तर अच्छा माना जाता है जिसमें स्वास्थ्य जोखिम बहुत कम होता है. लाहौर में पीएम 2.5 की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सालाना दिशानिर्देश से 60 गुना ज्यादा थी. पीएम 2.5 वे छोटे कण होते हैं जो फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा बीमारियों और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ाते हैं.
तापमान में गिरावट और धीमी हवाओं ने लाहौर की हवा को और खराब किया. दिल्ली में आईक्यूएयर ने 215 जबकि भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 332 का स्तर बताया जो बहुत खराब श्रेणी में आता है. दोनों रीडिंग में अंतर अलग-अलग माप पद्धतियों के कारण है.
पाकिस्तान सरकार ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले ईंट भट्टों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है और किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की है. दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान सोमवार से लागू हो गया है जिसमें प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, निर्माण कार्यों, ढाबों में कोयला-लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक और सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं.
दीवाली के कारण प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार और रविवार को सिर्फ तीन-तीन घंटे कम प्रदूषण वाले पटाखे फोड़ने की अनुमति दी है. यह समस्या हर साल इस समय दोहराई जाती है. ठंडी हवा प्रदूषण को फैला नहीं पाती जिससे शहरों पर जहरीली चादर छ जाती है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए जोखिम सबसे ज्यादा है.
विशेषज्ञ कहते हैं कि फसल जलाने, वाहनों के धुएं और औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्ती के साथ लंबे समय के समाधान जैसे स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर सार्वजनिक परिवहन की जरूरत है. दोनों देशों में समन्वित प्रयास से ही इस क्षेत्रीय समस्या पर काबू पाया जा सकता है. फिलहाल लोग मास्क पहनें, बाहरी गतिविधियों को सीमित रखें और आधिकारिक सलाह का पालन करें.

