'व्हाइट हाउस' में काटे जूनियर के बाल... बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में 80 छात्रों पर एक्शन, 15 लड़कियां भी शामिल
राजस्थान के बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग के आरोप में 80 मेडिकल छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. इनमें 15 छात्राएं भी शामिल हैं. जांच में सीनियर छात्रों के WhatsApp चैट, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में आपत्तिजनक सामग्री मिली. हालांकि, जूनियर छात्रों के साथ मारपीट की पुष्टि नहीं हुई है.
राजस्थान के बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक मामला सामने आया है. यहां फर्स्ट ईयर के मेडिकल छात्रों को कथित तौर पर परेशान करने और उनके साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप में कॉलेज प्रशासन ने 80 छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की है. अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई की जद में आने वाले छात्रों में 15 छात्राएं भी शामिल हैं. कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की जांच के बाद शनिवार को ये अनुशासनात्मक कदम उठाए गए.
जांच में सामने आया कि सीनियर छात्र कथित तौर पर जूनियर छात्रों से परिचय देने के लिए दबाव बनाते थे. इसके अलावा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने और WhatsApp ग्रुप व चैट में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप भी मिले. कुछ जूनियर छात्रों को 'व्हाइट हाउस' नाम के एक कमरे में ले जाने का भी आरोप है. वहां कथित तौर पर उनके बाल जबरन काटे गए थे. इन शिकायतों के बाद कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू की थी.
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल अनूप सिंह गुर्जर ने बताया कि शिकायतें मिलने के बाद कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने हर आरोप की अलग-अलग जांच की. कमेटी ने जूनियर छात्रों से बातचीत की और सीनियर व जूनियर दोनों के मोबाइल फोन की जांच की. जांच के दौरान WhatsApp चैट, वीडियो और दूसरे डिजिटल सबूतों को खंगाला गया. प्रिंसिपल के मुताबिक, इस पूरी जांच प्रक्रिया में करीब तीन से चार घंटे लगे.
प्रिंसिपल अनूप सिंह गुर्जर ने बताया कि जांच में ऐसी चैट मिलीं, जिनमें सीनियर छात्र जूनियर छात्रों से परिचय देने की मांग कर रहे थे. सोशल मीडिया और WhatsApp बातचीत में आपत्तिजनक सामग्री के साथ अभद्र भाषा भी पाई गई. प्रशासन ने संबंधित छात्रों के मोबाइल फोन जब्त कर डिजिटल सामग्री की जांच की थी. हालांकि, जांच में जूनियर छात्रों के साथ शारीरिक मारपीट की कोई घटना सामने नहीं आई.
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रशासन ने कुल 80 छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की. इनमें से 13 छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया. बाकी छात्रों पर उनकी भूमिका और आरोपों के आधार पर अलग-अलग अवधि के लिए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने पर रोक लगाई गई. अनुशासनात्मक आदेशों में कुछ छात्रों के लिए क्लास, प्रैक्टिकल, क्लिनिकल पोस्टिंग और परीक्षाओं में शामिल होने पर भी पाबंदी लगाई गई है.
आदेश के मुताबिक, छह छात्रों को हॉस्टल से निकालने के साथ 60 दिनों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है. इस दौरान वे लेक्चर, प्रैक्टिकल, क्लिनिकल पोस्टिंग और परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेंगे. इसके अलावा इन छह छात्रों के सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने पर एक साल तक रोक लगाई गई है.
वहीं, सात अन्य छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर 30 दिनों के लिए शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों से प्रतिबंधित किया गया है. इसके अलावा 11 छात्रों को 30 दिनों के लिए हॉस्टल से हटाया गया है. इन 11 छात्रों को 15 दिनों तक शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित रखने और एक साल तक सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने से रोकने का आदेश दिया गया है.
पीटीआई के मुताबिक, इस मामले में कॉलेज प्रशासन ने 29 अक्टूबर को नेशनल हेल्थ कमीशन को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी. दरअसल, आयोग ने रैगिंग के आरोपों पर कॉलेज से रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने शिकायतों, छात्रों के बयानों और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच पूरी की. जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कॉलेज प्रशासन ने संबंधित छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की.

