टीचर भर्ती रद्द हुई तो सिलाई करने लगीं, अब बन गईं सरपंच... शारदा राणा ने 6 करोड़पति उम्मीदवारों को चुनाव में दी पटखनी
कहते हैं कि किस्मत कब और कहां पलट जाए, कोई नहीं जानता. जिस महिला का सपना शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य संवारने का था, वह आज गांव की सरपंच बनकर ग्रामीणों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी संभालने जा रही है. यह कहानी है जालोर जिले की भैंसवाड़ा ग्राम पंचायत की नवनिर्वाचित सरपंच शारदा कुमारी राणा की.
पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती निरस्त होने के चलते शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह गया. बीए और बीएड की डिग्री हासिल करने के बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिली तो शारदा ने हार नहीं मानी. सिलाई का काम करते हुए अपनी तैयारियां जारी रखीं. लेकिन इस बार उन्होंने चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई और ऐसी जीत दर्ज की, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी.
यह भी पढ़ें: प्यार, पंचायत चुनाव और सोशल इंजीनियरिंग... Love मैरिज करके आई बहू ने हरा दिए 11 उम्मीदवार
दरअसल, आहोर विधानसभा क्षेत्र की भैंसवाड़ा ग्राम पंचायत में सरपंच पद की सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी. चुनाव में कुल 13 महिला उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया, जिनमें से दो ने नाम वापस ले लिया.इसके बाद मैदान में 11 महिला प्रत्याशी रह गईं. इनमें पांच सामान्य वर्ग, 5 ओबीसी वर्ग और एकमात्र अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग की उम्मीदवार शारदा कुमारी राणा थीं.
30 अक्टूबर को हुए मतदान में ग्राम पंचायत के कुल 4159 मतों में से 2671 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. 107 वोट खारिज हुए और 13 मत नोटा को मिले.कुल 2564 वैध मतों में शारदा कुमारी राणा को 650 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी उमाकुमारी को 461 वोट मिले. इस तरह शारदा राणा ने 189 मतों से शानदार जीत दर्ज कर सरपंच पद पर कब्जा जमा लिया.
शारदा राणा की जीत इसलिए भी खास बन गई, क्योंकि उन्होंने जिस प्रत्याशी को हराया, वह क्षेत्र की जानी-मानी राजनीतिक और रावला परिवार की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती हैं.
उमाकुमारी आहोर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे माधोसिंह के पौत्र शिवप्रताप सिंह की पत्नी हैं. वह भैंसवाड़ा के हेरिटेज रावला की मालकिन भी हैं. चुनावी शपथ पत्र में उमाकुमारी ने अपनी कुल संपत्ति 6 करोड़ 56 लाख 34 हजार 596 रुपये घोषित की थी. उनके पति शिवप्रताप सिंह वर्ष 2015 में भैंसवाड़ा के सरपंच भी रह चुके हैं.
इसके बावजूद गांव की सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाली शारदा राणा ने चुनाव में उन्हें शिकस्त देकर साबित कर दिया कि लोकतंत्र में मतदाता का फैसला ही सबसे बड़ी ताकत है.
नवनिर्वाचित सरपंच शारदा कुमारी राणा के पति अचलेश्वर राणा ने बताया कि गांव की जनता ने जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास रहेगा. सभी को साथ लेकर गांव के विकास को आगे बढ़ाया जाएगा.
कुल मिलाकर भैंसवाड़ा पंचायत का यह चुनाव सिर्फ एक सरपंच की जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और लोकतांत्रिक ताकत की एक ऐसी कहानी बन गया है, जहां शिक्षक बनने का सपना देखने वाली बीए-बीएड डिग्रीधारी महिला ने सिलाई के काम से अपने संघर्ष को जारी रखा और आखिरकार गांव की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हासिल कर ली.

