एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की 40 एकड़ जमीन पर क्या है विवाद, राजनाथ तक पहुंचा मामला
देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित भारतीय वायु सेना के एक ऐतिहासिक एयरफोर्स स्टेशन के करीब 40 एकड़ हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस जमीन पर बने एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को बंद कर दिया गया है. यहां वायु सेना के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल और दूसरी खेल सुविधाएं मौजूद थीं. सरकार की जमीन वापस लेने की प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है.
इस फैसले ने वायु सेना के भीतर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि मामला सिर्फ एक खेल परिसर या मनोरंजन की सुविधा तक सीमित नहीं है. जिस एयरफोर्स स्टेशन के भीतर यह जमीन आती है, वहां सैन्य, प्रशासनिक, प्रशिक्षण और सुरक्षा से जुड़ी अहम व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं. पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी रिटायर होने से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने इस जमीन को वायु सेना के नियंत्रण से बाहर किए जाने पर चिंता जताई थी.
40 एकड़ जमीन पर क्या है पूरा विवाद?
दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित एयरफोर्स स्टेशन के भीतर करीब 40 एकड़ जमीन पर एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बना हुआ है. यह परिसर दशकों से वायु सेना की खेल और मनोरंजन संबंधी गतिविधियों का हिस्सा रहा है. यहां गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल और अन्य खेल सुविधाएं उपलब्ध थीं. अब इस परिसर को बंद कर दिया गया है.
यह कार्रवाई केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय यानी MoHUA के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय के सर्वे के बाद हुई. सरकार इस इलाके में मौजूद कुछ प्रमुख जमीनों को वापस लेने की प्रक्रिया चला रही है. इसी प्रक्रिया के तहत एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी प्रभावित हुआ है. इस फैसले का असर तुरंत दिखाई दिया.
पूर्व वायु सेना प्रमुख एपी सिंह के सम्मान में 28 अक्टूबर को होने वाला पारंपरिक 'गोल्फिंग आउट' कार्यक्रम रद्द करना पड़ा. वायु सेना में यह कार्यक्रम निवर्तमान प्रमुख की विदाई से जुड़ी एक परंपरा रहा है.
नई दिल्ली के रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन स्थित भारतीय वायुसेना के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को बंद किए जाने से वायुसेना के पूर्व अधिकारियों में निराशा है. वायुसेना के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जिस तरीके से इस परिसर को अपने कब्जे में लिया गया, उससे वायुसेना के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.
इंडिया टुडे को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ग्रुप कैप्टन अजय कुमार अहलावत (रिटायर्ड) ने कहा कि पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के सम्मान में होने वाला पारंपरिक 'गोल्फिंग आउट' विदाई समारोह रद्द होना विशेष रूप से दुखद रहा. यह समारोह पद छोड़ने वाले वायुसेना प्रमुख के प्रति सम्मान जताने का प्रतीक था.
यह भी पढ़ें: ताइवान के पास 24 घंटे में पहुंचे चीन के 49 फाइटर जेट, क्या अब नई जंग होगी?
उन्होंने कहा कि वायुसेना अपने प्रमुखों को बहुत सम्मान देती है. विदाई समारोह रद्द होने से सेवारत और सेवानिवृत्त, दोनों तरह के वायुसेना कर्मियों की भावनाएं आहत हुई हैं.
अहलावत ने कहा कि अगर सरकार को राष्ट्रीय हित में इस जमीन की जरूरत है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था. वायुसेना को पर्याप्त समय दिया जा सकता था. इस बारे में उचित तरीके से जानकारी दी जा सकती थी.
यह एयरफोर्स स्टेशन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि संबंधित जमीन एक सामान्य खेल परिसर के भीतर नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन के अंदर स्थित है. यह सैन्य प्रतिष्ठान 1940 के दशक में स्थापित हुआ था. दशकों से भारतीय वायु सेना के नियंत्रण में रहा है. यहां एयर हेडक्वार्टर को सहयोग देने वाली व्यवस्थाएं मौजूद हैं. 5,000 से अधिक सैन्यकर्मी तथा अन्य कर्मचारी इससे जुड़े हैं.
इस स्टेशन में विवाहित और अविवाहित वायु सेना कर्मियों के रहने की व्यवस्था, एयरमैन और अग्निवीरवायु कर्मियों के प्रशिक्षण की सुविधाएं, चिकित्सा सेवाएं और कई प्रशासनिक कार्यालय मौजूद हैं. यानी यह जगह सिर्फ खेलकूद या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल नहीं होती, बल्कि वायु सेना के रोजमर्रा के कामकाज और कर्मचारियों की जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाती है.
इसके अलावा यहां सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं भी हैं. दिल्ली की एकीकृत वायु रक्षा व्यवस्था यानी दिल्ली इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सेंटर के तहत हवाई सुरक्षा और ड्रोन जैसे मानवरहित हवाई सिस्टम से निपटने की तैयारियों से जुड़ी व्यवस्थाएं भी इस स्टेशन के महत्व को बढ़ाती हैं. यहां VIP-89 सुरक्षा कवच और हेलिपैड जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं. इसलिए इस जमीन के भविष्य को लेकर सवाल केवल खेल सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे सैन्य प्रतिष्ठान की जरूरतों से जुड़े हैं.
यह भी पढ़ें: रात तक कमजोर होगा मुरासु, बापटला में 222 मिमी बारिश... आंध्र के तटीय इलाकों में तबाही
एपी सिंह ने रिटायरमेंट से पहले राजनाथ सिंह को क्यों लिखा?
इस जमीन को लेकर वायु सेना की चिंता पूर्व एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के कार्यकाल के दौरान ही रक्षा मंत्रालय तक पहुंच गई थी. 26 अक्टूबर को, यानी अपनी रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले, उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने प्रस्तावित जमीन हस्तांतरण का मुद्दा उठाया था.
एपी सिंह ने इस बात पर जोर दिया था कि एयरफोर्स स्टेशन की सैन्य गतिविधियों, प्रशासनिक जरूरतों और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जमीन का वायु सेना के नियंत्रण में बने रहना जरूरी है. उन्होंने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया था. उनकी चिंता का आधार यह था कि किसी सैन्य प्रतिष्ठान की जमीन का महत्व केवल उस पर मौजूद इमारतों या सुविधाओं से नहीं आंका जा सकता. उसका इस्तेमाल, भविष्य की जरूरतें और सुरक्षा से जुड़ी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं.
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पूर्व वायु सेना प्रमुख ने इसे अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले रक्षा मंत्री के सामने उठाया. इससे स्पष्ट होता है कि जमीन को लेकर चिंता केवल किसी एक खेल सुविधा के बंद होने तक सीमित नहीं थी.
एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को बंद किए जाने की घटना दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के आसपास की प्रमुख जमीनों को वापस लेने की व्यापक सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है. इस इलाके में कई महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित संपत्तियां हैं. रिपोर्ट के अनुसार, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय दिल्ली जिमखाना क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड जैसी संपत्तियों की जमीन वापस लेने की प्रक्रिया भी चला रहा था.
इसके अलावा करीब 53 एकड़ में फैले दिल्ली रेस क्लब की जमीन भी सरकार ने अपने कब्जे में ले ली है. अब एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की करीब 40 एकड़ जमीन भी इसी अभियान के दायरे में आ गई है. इससे राजधानी के इस महत्वपूर्ण इलाके में सरकारी जमीनों के इस्तेमाल और उनके भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है.
किसी जमीन को सार्वजनिक उपयोग के लिए वापस लेना और किसी सैन्य प्रतिष्ठान की जमीन का हस्तांतरण करना दो अलग-अलग पहलू हैं. सैन्य जमीन के मामले में यह देखना जरूरी होता है कि प्रस्तावित बदलाव से मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की सुविधाओं और भविष्य की सैन्य जरूरतों पर क्या असर पड़ेगा.
नए वायु सेना प्रमुख के सामने क्या चुनौती होगी?
अब एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने वायु सेना प्रमुख का पद संभाल लिया है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उनके पूर्ववर्ती एपी सिंह की ओर से उठाई गई चिंताओं पर सरकार दोबारा विचार करती है. फिलहाल इस पूरे मामले का केंद्र यह सवाल है कि क्या 40 एकड़ जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया के बावजूद एयरफोर्स स्टेशन की सैन्य, प्रशासनिक और सुरक्षा जरूरतों को सुरक्षित रखा जा सकेगा.
इस विवाद को केवल गोल्फ कोर्स और स्विमिंग पूल बंद होने के रूप में देखना सही नहीं होगा. असली सवाल यह है कि राजधानी के बीचोंबीच स्थित एक ऐतिहासिक सैन्य प्रतिष्ठान की जमीन का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा और क्या किसी बदलाव से उसकी मौजूदा जिम्मेदारियां प्रभावित होंगी. सरकार के लिए सार्वजनिक हित और जमीन के बेहतर इस्तेमाल के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा तथा वायु सेना की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी.


