खेलते-खेलते 3 साल की बच्ची की सांस की नली में फंस गया सीताफल का बीज, अहमदाबाद के डॉक्टरों ने बचाई जान

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फल खाते समय या खेलते हुए छोटे बच्चे कब क्या चीज मुंह में डाल लें, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. कई बार उनकी यही छोटी-सी शरारत बड़ी मुसीबत बन जाती है. गुजरात के अहमदाबाद में तीन साल की एक बच्ची के साथ भी ऐसा ही हुआ. खेलते समय उसके शरीर में कोई चीज चली गई. कुछ ही देर में उसे लगातार...

फल खाते समय या खेलते हुए छोटे बच्चे कब क्या चीज मुंह में डाल लें, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. कई बार उनकी यही छोटी-सी शरारत बड़ी मुसीबत बन जाती है. गुजरात के अहमदाबाद में तीन साल की एक बच्ची के साथ भी ऐसा ही हुआ. खेलते समय उसके शरीर में कोई चीज चली गई. कुछ ही देर में उसे लगातार खांसी आने लगी, सांस लेने में परेशानी होने लगी और उल्टी भी हुई. जांच में पता चला कि उसके सांस लेने की नली में सीताफल का बीज फंसा हुआ है.

बच्ची की हालत गंभीर थी. उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर वहां से दूसरे अस्पताल और आखिर में अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर किया गया. यहां डॉक्टरों ने एक मुश्किल प्रक्रिया के जरिए उसकी सांस की नली में फंसा सीताफल का बीज निकाल दिया. अब बच्ची की हालत स्थिर है और उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है.

तीन साल की यह बच्ची अरावली जिले के मालपुर की रहने वाली है. जब वह खेल रही थी, तब उसने गलती से कोई चीज निगल ली थी. इसके बाद उसे लगातार खांसी होने लगी. सांस लेने में दिक्कत हुई और उल्टी भी शुरू हो गई. बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिवार वाले उसे तुरंत मोडासा के स्थानीय अस्पताल ले गए. वहां से बेहतर इलाज के लिए उसे हिम्मतनगर के GMERS अस्पताल भेज दिया गया.

हिम्मतनगर में डॉक्टरों ने बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया. इसके बाद CT स्कैन कराया गया. जांच में पता चला कि बच्ची की बाईं मुख्य सांस की नली में कोई बाहरी चीज फंसी हुई है. यानी हवा फेफड़ों तक पहुंचने के रास्ते में रुकावट आ गई थी. बच्ची की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे अहमदाबाद के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया.

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने कैसे बचाई जान?

26 अक्टूबर की सुबह बच्ची को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया. यहां डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए इलाज शुरू किया. पहले बच्ची की हालत को संभाला गया. जब उसकी स्थिति कुछ ठीक हुई, तो सांस की नली में फंसी चीज निकालने की तैयारी की गई. सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. राकेश जोशी ने एनेस्थीसिया विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोनल और उनकी टीम के साथ मिलकर इलाज किया.

डॉक्टरों ने 'थेराप्यूटिक ब्रोंकोस्कोपी' नाम की सर्जरी की. आसान भाषा में समझें तो इस तरीके में एक खास उपकरण की मदद से सांस की नली के अंदर देखा जाता है और वहां फंसी चीज को निकालने की कोशिश की जाती है. डॉक्टरों ने इसी प्रोसेस से बच्ची की बाईं मुख्य सांस की नली में फंसा सीताफल का बीज बाहर निकाल दिया. अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और उसे छुट्टी दी जा रही है.

इस घटना के बाद अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने छोटे बच्चों के माता-पिता को सावधान रहने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चे अक्सर खेलते समय सिक्के, खिलौनों के छोटे हिस्से, बीज या खाने की चीजें मुंह में डाल लेते हैं. अगर इनमें से कोई चीज सांस की नली में चली जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. सांस की नली में रुकावट होने से बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा भी पैदा हो सकता है. डॉक्टरों ने माता-पिता को सलाह दी है कि बच्चों के आसपास सिक्के, छोटे खिलौने, बीज और ऐसी दूसरी चीजें खुली न छोड़ें, जिन्हें वे आसानी से मुंह में डाल सकते हैं. खाना खाते या खेलते समय भी बच्चों पर नजर रखें.

अगर किसी बच्चे को अचानक तेज या लगातार खांसी आने लगे, सांस लेने में परेशानी हो या दम घुटने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य खांसी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर तब, जब बच्चा कुछ खाते या खेलते समय अचानक ऐसी परेशानी महसूस करने लगे. ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लें. बच्चे को जबरदस्ती कुछ खिलाने-पिलाने या गले में फंसी चीज को उंगली डालकर निकालने की कोशिश न करें. अगर बच्चा सांस नहीं ले पा रहा है, तो यह मेडिकल इमरजेंसी है. तुरंत अस्पताल पहुंचें.

Original Source
https://www.aajtak.in/india/gujarat/story/ahmedabad-doctors-remove-custard-apple-seed-girl-windpipe-save-life-lcla-rptc-2684979-2026-10-31?utm_source=rss
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