चार लिफ्ट होने के बाद भी सीढ़ियों से 21वीं मंजिल तक ईंटें ले ढोते रहा मजदूर, वीडियो वायरल

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो चर्चा में है, जिसने एक बार फिर हमारे समाज में मजदूरों के साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो में एक निर्माण मजदूर अपने कंधों पर भारी-भारी ईंटें लादकर 21वीं मंजिल तक ले जाता दिखाई दे रहा है. हैरानी की बात यह है कि जिस बिल्डिंग मे...

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो चर्चा में है, जिसने एक बार फिर हमारे समाज में मजदूरों के साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो में एक निर्माण मजदूर अपने कंधों पर भारी-भारी ईंटें लादकर 21वीं मंजिल तक ले जाता दिखाई दे रहा है. हैरानी की बात यह है कि जिस बिल्डिंग में वह काम कर रहा था, वहां चार लिफ्ट मौजूद थीं. इसके बावजूद मजदूर को इतनी ऊंचाई तक ईंटें पहुंचाने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा.

इस वीडियो को देखकर लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर जब बिल्डिंग में लिफ्ट मौजूद थीं, तो मजदूर को इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ी? क्या उसे लिफ्ट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी? क्या सोसायटी के नियमों के कारण उसे ऐसा करना पड़ा या फिर निर्माण कार्य से जुड़े लोगों ने उसकी सुविधा के बारे में सोचा ही नहीं?

वीडियो में दिखाई देने वाली घटना के पीछे की पूरी वजह स्पष्ट नहीं है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मजदूर को जानबूझकर लिफ्ट इस्तेमाल करने से रोका गया. लेकिन इस घटना ने एक ऐसी समस्या की ओर ध्यान जरूर खींचा है, जिसका सामना देश की कई बड़ी हाउसिंग सोसायटियों और अपार्टमेंट में काम करने वाले मजदूरों को करना पड़ता है. वीडियो में आप देख सकते हैं कि वीडियो बनाने वाला कहता है कि इस बिल्डिंग में 4 लिफ्ट है, इसके बाद भी मजदूरों को 21 वीं मंजिल पर सीढ़ियों से ईंटें पहुंचा रहा है.सोसाइटी में मजदूरों के लिए अलग नियम क्यों बन जाते हैं? आजकल बड़े शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतें बन रही हैं. इन इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए लिफ्ट, पार्किंग, सिक्योरिटी, गार्डन और दूसरी कई सुविधाएं होती हैं. लेकिन इसी बिल्डिंग में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति कई बार अलग होती है. कई हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम बनाए जाते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ जगहों पर घरेलू सहायकों, डिलीवरी करने वालों, सफाई कर्मचारियों और निर्माण मजदूरों के लिए अलग एंट्री या सर्विस लिफ्ट की व्यवस्था होती है. इसके पीछे कुछ व्यावहारिक कारण भी होते हैं. जैसे लिफ्ट को गंदगी, धूल और निर्माण सामग्री से बचाना, लोगों की आवाजाही में परेशानी न होने देना और बिल्डिंग की साफ-सफाई बनाए रखना. लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब इन नियमों के कारण मजदूरों को बुनियादी सुविधाओं से भी दूर कर दिया जाता है. अगर किसी बिल्डिंग में सर्विस लिफ्ट है, तो निर्माण सामग्री ले जाने के लिए उसका इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर लिफ्ट उपलब्ध नहीं है या इस्तेमाल करना संभव नहीं है, तो मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरी व्यवस्था होनी चाहिए.सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति मजदूरी करता है, उसे जरूरत से ज्यादा शारीरिक परेशानी उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. दूरों को लिफ्ट इस्तेमाल करने से क्यों रोका जाता है? बड़ी सोसाइटियों में लिफ्ट के इस्तेमाल को लेकर कई तरह के नियम होते हैं. कुछ जगहों पर लिफ्ट केवल सोसाइटी के निवासियों के लिए होती है, जबकि सामान लाने-ले जाने के लिए अलग सर्विस लिफ्ट रखी जाती है. कई बार निर्माण सामग्री ले जाने के दौरान लिफ्ट में धूल, सीमेंट या दूसरी चीजें गिरने का डर रहता है. ऐसे में सोसायटी प्रबंधन लिफ्ट के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा सकता है. इसके अलावा कुछ जगहों पर बिल्डिंग के निर्माण या मरम्मत का काम करने वाले ठेकेदारों को भी सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था खुद करनी होती है.

अगर ठेकेदार ने मजदूरों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटाए, तो इसका बोझ सीधे मजदूरों पर पड़ सकता है. हालांकि, इन सभी बातों का मतलब यह नहीं है कि मजदूरों को भारी सामान लेकर कई मंजिलों तक सीढ़ियां चढ़नी चाहिए. नियम बनाने का मकसद व्यवस्था बनाए रखना होना चाहिए, न कि किसी की मुश्किल बढ़ाना. 21वीं मंजिल तक ईंटें ले जाना कितना मुश्किल है? जरा कल्पना कीजिए कि आप अपने घर की सीढ़ियां सिर्फ दो-तीन बार चढ़ते हैं, तो सांस फूलने लगती है. ऐसे में किसी व्यक्ति को अपने कंधे या पीठ पर भारी ईंटें रखकर 21वीं मंजिल तक जाना पड़े, तो उसके लिए यह कितना मुश्किल होगा. निर्माण मजदूरों को दिनभर शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है. उन्हें ईंटें उठानी होती हैं, सीमेंट और रेत ढोनी होती है और कई बार ऊंचाई पर भी काम करना पड़ता है.

ऐसे में लगातार भारी वजन उठाकर सीढ़ियां चढ़ना शरीर पर बहुत ज्यादा दबाव डाल सकता है. इससे मांसपेशियों में खिंचाव, कमर और घुटनों में चोट, थकान और गिरने का खतरा बढ़ सकता है. खासतौर पर जब कोई मजदूर पहले से ही कई घंटे काम कर चुका हो, तब उसके लिए इतनी ऊंचाई तक वजन ले जाना और भी मुश्किल हो सकता है. नोट: Aajtak.in इस खबर की पुष्टि नहीं करता है. यह वायरल हो रहे खबर के आधार पर लिखी गई है.

Original Source
https://www.aajtak.in/trending/story/construction-worker-carries-bricks-21st-floor-despite-four-lifts-society-rttw-dskc-2684911-2026-10-31?utm_source=rss
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