ऑपरेशन सिंदूर का शौर्य और तेजस विवाद में सवाल... एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के 10 अहम मोमेंट, कल हो रहे रिटायर
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 30 सितंबर 2024 को भारतीय वायुसेना के प्रमुख बने थे. 31 अक्टूबर 2026 को वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर, तेजस विमानों की डिलीवरी में देरी पर खुली चर्चा, स्क्वॉड्रन कमी की चेतावनी और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के प्रयास शामिल रहे.
वे फाइटर पायलट, एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं. उनके पास पांच हजार घंटे से ज्यादा उड़ान अनुभव है. वायुसेना अब वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 29वें चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में जिम्मेदारी सौंपने वाली है. उनके कार्यकाल के दस प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं.
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मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. एयर चीफ मार्शल सिंह ने बाद की ब्रीफिंग और सार्वजनिक बयानों में बताया कि तीनों सेनाओं ने मिलकर काम किया. सितंबर 2025 में उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के पास स्पष्ट लक्ष्य थे. वे बिना किसी रोक-टोक के संचालित हुए. उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रडार, कमांड सेंटर, हैंगर और विमानों को हुए नुकसान का जिक्र किया. इस ऑपरेशन को उन्होंने तीनों सेवाओं के बीच प्रभावी समन्वय का उदाहरण बताया. यह घटना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई रही.
एयरो इंडिया 2025 के दौरान एयर चीफ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की क्षमता पर सवाल उठाए. तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी पहले से देर से चल रही थी. उन्होंने उत्पादन समस्याओं को हल करने के लिए मिशन-मोड अप्रोच की कमी की आलोचना की. उन्होंने एचएएल पर भरोसे की कमी जताई और तेजी से काम करने की अपील की. जीई एफ404 इंजन की सप्लाई और विमान की तैयारी से जुड़ी दिक्कतों को सार्वजनिक चर्चा में लाया गया. यह बयान स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम की देरी को लेकर सबसे चर्चा में रहा.
मई 2025 में CII के वार्षिक सम्मेलन में एयर चीफ ने रक्षा खरीद में जवाबदेही की मांग की. उन्होंने पूछा कि ऐसे ठेके क्यों किए जाते हैं जिनकी डिलीवरी समय पर संभव नहीं होती. देरी से ऑपरेशनल तैयारी प्रभावित होती है. आत्मनिर्भरता सिर्फ ठेके साइन करने या प्रोजेक्ट घोषित करने से नहीं आती. उपकरण समय पर बलों तक पहुंचना चाहिए. यह संदेश उनके कई बयानों में दोहराया गया. रक्षा निर्माण व्यवस्था के लिए चेतावनी बना.
एयर चीफ ने बार-बार कहा कि ड्रोन युद्ध के स्वरूप को बदल रहे हैं लेकिन पारंपरिक लड़ाकू विमानों की जगह नहीं ले सकते. सितंबर 2025 में उन्होंने मैनड और अनमैन्ड प्लेटफॉर्म के बीच संतुलन की वकालत की. लंबी दूरी के हथियार, ड्रोन, प्रिसिजन सिस्टम और लड़ाकू विमानों को एक साथ जोड़ने की जरूरत बताई. भविष्य के ऑपरेशन किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं बल्कि विभिन्न तकनीकों के एकीकरण पर आधारित होंगे.
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अक्टूबर 2026 में अपनी अंतिम वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ ने सबसे मजबूत आंकलन दिया. उन्होंने कहा कि वायुसेना के पास अधिकृत 42.5 स्क्वॉड्रन के मुकाबले सिर्फ 29 फाइटर स्क्वॉड्रन हैं. गिरावट रोकने और ताकत बढ़ाने के लिए हर साल 36 से 40 लड़ाकू विमान यानी करीब दो स्क्वॉड्रन की जरूरत है. देरी से बल की क्षमता प्रभावित हो रही है. यह चेतावनी उनके कार्यकाल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी.
6. राफेल और अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तलाश
आउटगोइंग एयर चीफ ने फाइटर फ्लीट के विस्तार पर लगातार जोर दिया. अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने 114 विमानों वाले मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम का महत्व बताया, जो राफेल पर केंद्रित है. साथ ही तेजस मार्क-1ए, मार्क-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर प्रक्रिया सही रही तो एमआरएफए ठेका चालू वित्त वर्ष में हो सकता है. स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के विमान में देरी होने पर विकल्प तलाशने की बात भी कही. रूस के सू-57 ऑफर पर कोई फैसला नहीं हुआ है.
उनके कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर रहा. जोधपुर में तरंग शक्ति 2026 अभ्यास में कई देशों की वायुसेनाएं और पर्यवेक्षक शामिल हुए. अमेरिकी एफ-35, यूएई के एफ-16 तथा भारत के राफेल, तेजस और अन्य विमानों ने हिस्सा लिया. 12 अक्टूबर को उन्होंने इस अभ्यास के दौरान स्वदेशी तेजस में अपनी अंतिम फाइटर सॉर्टी भरी. यह पल खास रहा क्योंकि वे पहले नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में तेजस प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुके थे.
8. वायु शक्ति 2026: ऑपरेशनल तैयारी का प्रदर्शन
फरवरी 2026 में पोखरण में वायु शक्ति अभ्यास ने युद्ध जैसी परिस्थितियों में सटीक हमलों की क्षमता दिखाई. राफेल, सु-30एमकेआई, तेजस और मिराज 2000 लड़ाकू विमानों के साथ अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल रहे. दिन-रात के ऑपरेशन, हवाई वर्चस्व, ग्राउंड सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षमता का प्रदर्शन हुआ. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभ्यास को देखा.
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एयर चीफ ने तीनों सेनाओं के बीच ज्यादा एकीकरण का समर्थन किया लेकिन जल्दबाजी में थिएटर कमांड लागू करने से सावधान किया. उन्होंने कहा कि हर सेवा की मूल दक्षता बनाए रखनी चाहिए. ऑपरेशन सिंदूर को मौजूदा व्यवस्था में प्रभावी समन्वय का उदाहरण बताया. संरचनात्मक बदलाव सोच-समझकर किए जाने चाहिए.
10. एआई, स्वदेशी इंजन और भविष्य की वायु शक्ति
अंतिम मीडिया बातचीत में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वदेशी तकनीकों और घरेलू फाइटर इंजन के विकास पर जोर दिया. एआई से लैस वायुसेना की वकालत की लेकिन मानव निर्णय को केंद्र में रखने की बात कही. ड्रोन, लोइटिंग म्यूनिशन, सेंसर और पारंपरिक विमानों को एक साझा ढांचे में जोड़ने की जरूरत बताई.
एयर चीफ मार्शल सिंह का कार्यकाल वायुसेना की जरूरतों पर खुली चर्चा, खरीद में तेजी और स्वदेशी क्षमताओं को वास्तविक ताकत में बदलने की मांग के लिए याद किया जाएगा. 12 अक्टूबर को तेजस में अंतिम फाइटर सॉर्टी और 20 अक्टूबर को एयर फोर्स अकादमी में एचजेटी-16 किरण ट्रेनर में अपने पहले इंस्ट्रक्टर के साथ अंतिम उड़ान उनके करियर का भावनात्मक समापन रही.

